Sangharsh
By Soumya
क्या हुआ जो ,
आज धरा पर पड़े हो ,
क्या हुआ जो ,
आज दोराहे पर खड़े हो ,
क्या हुआ जो ये ,
विर्रुध है संसार ये ,
क्या हुआ जो ,
आज मन की हार है I
वक्त सबका है बदलता ,
ये बात तुम जान लो ,
आज तुम धरती पर गिरे हो ,
कल हिमालय पार लो I
एक हिमालय वो जो पर्वत शृंखला अपार है ,
एक हिमालय वो जो तुम्हारे मन का ही भार है ,
शृंखला जो ना पार कर सको तुम ,
मन विजयी होना तो सरल है ,
मन चंचल और पानी जैसा जो तरल है I
हिम्मत हो तो गिरनेवाले भी उठ जाते हैं ,
हिम्मत हो तो मन के हरे भी जीत जाते हैं ,
हिम्मत हो तो 100 के आगे 5 शास्त्र उठाते हैं ,
हिम्मत हो तो पर्वत भी सर झुकाते हैं I
अन्याय तुम सहो नहीं ,
गलत तुम कुछ करो नहीं ,
अपना मन साधो ,
हिम्मत बांधो I
अर्जुन हो तो कृष्ण भी मिल जाएंगे ,
राह भटको तो तुम्हें मार्ग भी दिखलायेंगे ,
तुम धनुष बाण उठाओ तो सही ,
सर्वोत्तम बनने का प्रयास करते क्यों नहीं ,
कृष्ण स्वयं तुम्हारे जीवन की धुरा उठाएंगे I
याद रखती है दुनिया उसे जो हारा नहीं ,
और हारा वही जो कभी लड़ा नहीं ,
ये युद्ध है तुम्हारा , लड़ाई भी तुम्हारी है ,
शास्त्र तुम्हें होगा उठाना , यहीं से चढ़ाई है .
अपना लक्ष्य देखो तुम ,
मन पर अंकुश साधो तुम ,
उठो और शास्त्र उठाओ ,
अब समय आ गया ,
हर ईंट को जवाब मिलेगा ,
पत्थर बनने का समय आ गया I
अपने धर्म के लिए युद्ध करो ,
मार्ग तुम्हारा प्रशस्त है ,
हथियारों से अब न डरो ,
कर्तव्व्य तुम्हारा निश्चित है I
क्या हुआ जो ,
आज हरे हो तुम ,
कल की लड़ाई ,
बाकी है अभी ,
तो उठो और ,
संघर्ष करो , न इससे डरो ,
क्योंकि नाम जीवन का दूसरा संघर्ष है I
By Soumya

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