Sangharsh
By Himanshu Sahwal
लड़ रहा हूं, बढ़ रहा हूं,
कोशिश भी मैं कर रहा हूं।
बनाकर नाकामियों से अपना मार्ग,
चुनौतियों से दोस्ती भी मैं कर रहा हूं ।
थक कर,हार कर,जब जब हो रहा शरीर है निढाल,
तब तब फिर खड़े होने की, अनुभूति भी मैं कर रहा हूं।
जली है लॉ जो साहस की अब भीतर,
बनाकर अग्नि उसे,उसमें मैं जल रहा हूं।
लड़ रहा हूं, बढ़ रहा हूं,
कोशिशभीमैंकररहाहूं।
By Himanshu Sahwal

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