Safed Saree
By Aarzoo Goel
एक लड़की सबसे दूर, अकेली, गुमसुम, चुप-चुप सीं रहा करती थीं
दिल में गहरे राज़ छपा रखे थे उसने, आँखें उसकी सारे दर्द बयान करती थीं
शायद कुछ कहना था उसको, पर ना जाने किससे डरती थी ॥
प्यार, जज़्बात, दोस्ती, रिश्ते-नातों से था परहेज़ उसको
एक छोटे से पिंजरे में क़ैद कर रखा था उसने ख़ुद को
सपनों के पंख लगाए खुले आसमान वो भी उड़ने की चाह रखती थीं
शायद कुछ कहना था उसको, पर ना जाने किससे डरती थी ॥
कुछ पल पहले तक अपनों के बीच में वो रहा करती थीं
सबके साथ बैठ हँसती थीं, खेलती थीं, गुनगुनाया करती थीं
अब बात कुछ और थीं, दुनिया उसको ख़ुद से अलग देखती थीं
नीले, गुलाबी, पीले रंगों जेसी थीं वो, पर अब ना जाने क्यों सफ़ेद वो साड़ी पहना करती थीं
शायद कुछ कहना था उसको, पर ना जाने किससे डरती थी ॥
एक शख़्स को देखा था मैंने, उसके दिल के झरोखे में
झूठ बोलता था, वो रखता था उसको धोखे में
बोलता था बाहर ना निकल इस दुनिया में, तु जल जाएगी, तु मर जाएगी
हवस की भूखी है ये दुनिया, ये दुनिया तुझको खा जाएगी
बस इसी लिए वो अपनी हर आरज़ू दिल में ही दफ़नाये रखती थीं
शायद कुछ कहना था उसको, पर ना जाने किससे डरती थी ॥
By Aarzoo Goel

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