Safar-E-Ishq
Updated: Jul 29, 2025
By Pratiksha Singh
कोई मोहब्बत ,कोई महज़ बुखार कहता है
कोई तैर गया समंदर, कोई तूफान से डरता है
किसी ने महबूब की आगोश में हर शह पा ली है
कोई आज भी चिरागों तले नज़्म लिखता है
के इश्क़ में अक्सर यही होता है।
किसी मौज सा कोई उठता और गिरता है
कभी खुशियों का समा, कभी ग़म -ए -हिज्र मिलता है
कभी खुदपे फक्र, कभी खुदसे रुसवाई है
कभी महफिल यार की, कभी गहरी तन्हाई है
के इश्क़ की रब ने यही तासीर बनाई है।
कभी लिखे कहानी प्यार की, कभी तकलीफों ने शहर बनाए है
कभी हस्ते हुए दिन निकले ,कभी यादों के काले साए है
कोई दर्द पाने से डरे यहां, किसी ने गमगिनी में आशियाने बनाए है
कभी बेशुमार पागलपन ,कभी खामोश हवाएं है
के इश्क़ के मैने कुछ ऐसे भी रंग पाए है।
किसी ने बेशर्त मोहब्बत की,कोई बैठा आस लगाए है
कोई नाप-तोल कर बात करे, किसी ने बेहिसाब गीत बनाए है
कोई आंखों के रास्ते इज़हार पढ़े, कोई लफ्ज़ भी समझ न पाए है
कोई कर तजुर्बा फना हुआ, कई देखा के पछताएं है
के इश्क़ ने किरदार ऐसे भी बनाए है
हां इश्क़ ने किरदार ऐसे भी बनाए है।
By Pratiksha Singh

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