Safar
Updated: Jul 29, 2025
By Madhav Menon
मैं राही हूं उन राहों का जहां सफ़र सुहावना हो
इस राह पर बस हो मेरे कदम, मंज़िल बस एक बहाना हो
हमसफर नहीं तो क्या, बस उनका ख्वाब ही सही
है हमसफर नहीं तो क्या, एक झलक ए आफताब ही सही
मंजूर नहीं मुझे ये अकेलापन
रम्ज है कुछ ये इस आलम का
राही है हजारों मगर है कैसा ये सूनापन
मिट भी जाऊँ तो न खत्म हो, किस्सा - ए - अलम का
तनहाई में बिताए पल न हो इसकी पहचान
ये सफर की भी शायद यही कामना हो
हो कदर हर लम्हे की, हर अरमान
हो सम्मान जब खुदा से सामना हो
दर्द हो तो बस तेरे न होने से
मगर ये सफर अधूरा न रहे
मुहब्बत भी हो तेरे एहसास से
जरूरत हो, मगर एहसान न रहे
ये सफर शायद साकार न हो
बस ये लम्हा उन ख्वाबों को अंजाम दे
इस सफर में गम की कोई जगह नहीं
आंसू बहाने की कोई वजह नहीं
एहसास - ए - दर्द भले इस तनहाई से कतराए
तेरे बिना तो ये सफ़र उस दर्द से भी रिहा नहीं
नफरत हो चुकी है मुझे गम से
और इश्क अपने अकेलेपन से
मैं काबिल नहीं की काबू मेरे दिल पे हो
काबू में आए जब सफर में तू शामिल हो
मैं राही हूं इस राह का, अंजाम मालूम नहीं
येराहहीमेरीमंजिलहै, इसकीतनहाईकोईजुल्मनहीं
By Madhav Menon

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