Ruk Ja Tham Ja Ai Jindagi
By Sunita Sharma
रुक जा...थम जा ऐ जिंदगी
एक पल के लिए...
फिर वही चल...
एक आम का पेड़
कुछ खट्टे मीठे पल
रुक जा...थम जा ऐ जिंदगी
फिर वही चल
वो प्यारी सी तितलियाँ
रंगीन थे वो पल
रुक जा थम जा ऐ जिंदगी
फिर वही चल
छत पर...दोपहर के बाद शाम
खेल खेल में बीते वो पल
रुक जा...थम जा ऐ जिंदगी
फिर वही चल
साइकिल की सवारी... लगती थी प्यारी
नहीं शर्मिंदा.. डबल सीट में भी खुश हर पल
रुक जा, थम जा ऐ जिंदगी
फिर वही चल
गोलगप्पे और चाट .. गरम वड़ा पाव
ठंडी बारिश की बूंदे
भीगे भीगे वो पल
रुक जा थम जा ऐ जिंदगी
फिर वही चल
बेफ़िक्र था वो बचपन
दोस्तों के साथ फिर थोड़े कुछ पल
चल चल ऐ जिंदगी फिर वही चल
By Sunita Sharma

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