Roothe Bhi Toh Kisse ?
By Alisha Salunkhe
जुदा भी हो तो कैसे तुमसे
रिहा करे खुद को कैसे
तुम्हारा नाम मिटाकर भी सब जगह से
क्या करे अगर तुम्हे दिल से ही ना निकल सके
तुम्हारा हर कहना मानते रहे,
झूटे वादें अपनाकर भी भरोसा करते रहे,
ऐ दिल-ए-नादान तू ऐसा क्यों है?
इस सब के बाद भी ये तुमसे नफ़रत नहीं, मोहब्बत ही करता है
तुम दूर हो कर भी पास लगते थे
तुम्हारे कहे हुए हर लफ्ज याद करते थे
मन में कही सवाल उल्झे बिखरे
ये मोहब्बत,
इंतजार इबादत का,
हमनावाई, शिकायतें, गलतियां, गिले शिकवे
ये रुठना, रोना,
खुद से खफा होना और तुझ पर मलाल आना,
इश्क ने भी क्या रातें दिखाई...
बस ख्याल आता है
अब रूटे भी तो किससे?
By Alisha Salunkhe

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