Rishta
By Sakshi Kumar
जो किसी का किसी से भी बन जाता है
प्यार का रिश्ता.. दो जिस्मों के मिलन का रिश्ता
बच्चों से मां – बाप का रिश्ता, नाना-नानी दादा-दादी से लाड का रिश्ता
भाई – बहन का नटखट आनंद जैसा रिश्ता
बुआ- फुफड़, मामा- मामी, चाचा-चाची, मोसा-मासी का रिश्ता
कभी काबार मिलने वाले दूर के अंकल हो या फिर कनाडा वाले चाचा वाला रिश्ता
यहां हर गली गली में रिश्ता है
सब्जी वाले भैया तो काम वाली आंटी है
दुध वाले अंकल तो इस्तरी वाले भैया है
यहां हर दुकान वाला भैया या तो अंकल है
अरे ये तो कुछ नहीं, दोस्ती भी एक अनोखा रिश्ता है
कोई दोस्त ख़ास तो कोई बस अवाई काम चलाओ है
कोई जिगरी यार तो कोई नफ़रत से रिश्ता निभाता है
यहां रिश्ते तो अब ऑनलाइन से बन जाते है
ना मिले ना देखा, बस चैटिंग से मित्र बन जाते है
फिर विडियो कॉलिंग से रिश्ते निभाते है
युही दोस्त का भाई हमारा भी भाई बन जाता है
दोस्त का दिल कहीं लग जाए तो युही जीजा और भाभी के रिश्ते बन जाते है
कोई पास ना हो या फिर साथ ना हो, तो यादों से रिश्ता बन जाता है
ज़िंदगी में रिश्ते कुछ नए तो कुछ पुराने धागे से बुनते है
एक गहरा एहसास है ये रिश्ता
जो हर किसी का किसी से बन जाता है
By Sakshi Kumar

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