Rajdan
By Yashendra Shiv
उसको मेरी बैचैनी का राजदां बनना है,
बाँहों मैं मुझको उसकी सुलाकर, सारी रात उसे जगना है।
उसको मेरी बैचैनी का राजदां बनना है,
कहूँ क्या उससे, वो इतनी मोहब्बत जो करती है मुझसे,
कहती है मुझसे वो, की उसे मेरा हमदर्द बनना है,
उसको मेरी बैचैनी का राजदां बनना है।
जानती है वो काफिर हूँ मैं,
फ़िर भी उसको ख़ुदा मेरा बनना है,
मिल जाए इस बंजारे को जो घर, आशियाँ उसे वो बनना है।
उसको मेरी बैचैनी का राजदां बनना है।
मेरे होने से ही अपनी ज़िन्दगी कामिल वो मानती है,
कहती है वो की जो मिले न तुम तो फारिग मुझे इस दुनिया से होना है,
उसको मेरी बैचैनी का राजदां बनना है।
By Yashendra Shiv

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