Prem Ehsaas
Updated: Aug 2, 2025
By Himani Sharma
आज बातें करता मुझसे दर्पण
पूछे क्यों किया इतना श्रृंगार है
अब कैसे बताऊँ उसको मैं
इस जीवन में खिल उठी बहार है
तू ही करण है मुस्कान है
इस अंबर को क्या मैं बता दूं
या समंदर की गहराईयों को
तेरे सुंदर चेहरे का पता दूं
जी चाहता है पर्वतों में
चीख चीख कर तेरा नाम लूं
जी चाहता है तेरी संगिनी बन
राधा सा मैं भी सम्मान लू
बन जा ना तू भी कान्हा
मोर पंख से मुकुट सजाऊंगी
तेरी आंखों में मैं खुद को देख
अनंत काल तक प्रीत निभाऊंगी
जब जब बंसी की धुन सुनूं
तेरी ओर खिची चली आउंगी
तेरे कंधे पे अपने सर को रख
बस तुझ में ही समा जाऊंगी
बन जा रे मेरा कान्हा
अवसाद में बीत रहे मास है
बैठी पलकें बिछाई तेरी राह पे
आजा, मद्धम हो रहे मेरे श्वास है
कैसे निहारूं किसी गैर को
ये निगाहें बस तेरे मुख की दास है
तूने पुछा- मैं कौन हूं तेरा
प्रिय, तू मेरा प्रेम सा एहसास है
तू मेरा प्रेम सा एहसास है
By Himani Sharma

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