घर का आंगन
Updated: May 18, 2023
By Praveen Kumar Das
वह सुबह की पहली किरण, जब घर के आंगन पर पड़ते है,
वह खिलते हुए पौधों के पुष्प, जब राह ढूंढते धरातल पर गिरते है,
टहनियों से जुड़े वह हरे कोमल पर्ण, जब हवाओं के मेल से झूमते है,
आश्चर्यचकित वह चिड़िया डाल पर, उनकी मीठी बोली से चहकते है,
वह निर्मल हवा, वह माटी की सौंधी सुगंध, मानो हर मनुष्य के चित मोह लेते है,
इस मनोरम वातावरण की सुंदरता में,
जब कोई स्त्री स्नान पश्चात बंधे हुए केश में,
मनमोहित आंगन की ओर बढ़ती है,
और जल की बौछार से सारे आंगन में,
मुस्कुराहट लिए जलनुमा मोती बिखेरती है,
तुलसी के पौधे, अन्य पौधों की क्यारियों को,
अपने शुद्ध मन से, उन्हें जलपान कराती है,
मानो वह दृश्य सुंदर पवित्र स्वर्ग की भांति है l
By Praveen Kumar Das

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