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Prakriti (प्रकृति)

Jan 6, 2023
2 min read

Updated: Jan 12, 2023

By Preeti Sharma





प्रकृति जिसका आविर्भाव हुआ भगवान से ,

भगवान वह×२ मिलकर बने हैं जो भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर के आह्वान से।


प्रकृति यूं तो वैज्ञानिकों के पहुंच से भी परे है,

क्योंकि ×२...ये पर +आकृति है, जिसमें एक एक रंग बहुत सुनहरे हैं।


इसके रंग तो इतने गहरे हैं...के, हर व्यक्ति के शरीर से लेकर संपूर्ण सृष्टि को प्रकृति घेरे हैं,

सृष्टि के पांच मूल जो कार्य करते ऐसे,जिनसे दूर होते अंधेरे हैं,

ये प्रकृति- २... जिसकी परिभाषा में ना तेरे- मेरे हैं।


प्रकृति में 'भूमि'.. जो रूप है धरती मां का,

' मां' संभाले हर तरह से..भार पूरे संसार का।


गगन×२ जो है यूं तो पिता समान,

तभी, वो पिता बिना किसी श्रेय के, करते साया सबको अपना बच्चा मान।


वायु का स्वरूप दिखाई देता वृक्षों से,

वो वृक्ष जो हैं प्रकृति के रक्षकों से।

वायु को महसूस करना यूं लगता सबको आसान,

मानो×२ कोई गले लगा हो आपको अपना जान।





अग्नि का इस प्रकृति में है ऐसा रूप,

जो यह ना हो तो, नकारात्मकता का आप पाओगे अलग स्वरूप।

' अग्नि' लोगों के अंत का नहीं है कारण,

क्योंकि×२ ये बनाए हर अति को साधारण।


'नीर' कहूं या 'जल' या कहूं 'अमृत',

इसके बिना अक्सर लोग हो जाते हैं मृत।

' नीर' जो अधिकतम हिस्सा भूमि का घेरे हुए हैं,

तभी, इस संसार के लोगों के जीवन में, अलग ही सवेरे हुए हैं।


ये तो बात हुई पांच तत्वों की,यह प्रकृति है...

जो स्वयं उदाहरण है प्रभु की लीला की।

इसका ओर ना छोर पा सका है इंसान,

क्योंकि, ये पर+आकृति यानी- मेरे प्रभु की कृति है, तो इसे समझ पाना नहीं है इतना आसान।



प्रकृति के अनेकों रंग जैसे...

हरा दिखे के पेड़ों में,

पीला दिखे सूर्य में,

भूरा दिखे भूमि में,

नीला दिखे नीर में,

और लाल दिखे अग्नि में,...

यह रंग...बिखरे रहते हर जीवन में ऐसे।


ये रंग खुशियों का है पिटारा...,

प्रकृति को बनाने वाले धन्यवाद है तुम्हारा।



प्रकृति का नियम है..बदलाव,

मगर×२ उसकी जड़ से नहीं होता है अलगाव।

बदलाव को स्वीकारना है जरूरी,

यह प्रकृति है× २ जो संभाले हुए हैं सृष्टि को पूरी।


By Preeti Sharma







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