Prakriti Mein Parivartan
Updated: Jun 5, 2023
By L.Ashwini Reddy
जब याद आते हैं बचपन के वो दिन ,
मन प्रफ्फुल्लित हो उठता हे।
वो लेहलेहाते खेत और बहती नदियां ,
जगमगाते जुगनू और रंग बिरंगी तितलियाँ ,
गगन में उड़ते कौए और चील ,
मछलियों से भरे सरोवर और झील,
ख्यालों में आते हैं ऐसे दृश्य।
वो मीठी खुशबू से बागान का महकना ,
खिले फूलों पर मधुमखियों का मंडराना,
बारिश के बाद सौंधी खुशबू की अनुभूति होना ,
बिजली और गर्जन से हमारा भयातुर होना ,
ख्यालों में आते हैं ऐसे दृश्य।
सालों बीत गए विशवास नहीं होता ,
परिवेश बिलकुल बदल चूका हैं।
खेतो में फसल उगाने के बजाये ,
लालच के वजह से भूखंडो में बांटा जा रहा हैं,
शुद्ध भोजन और पानी के अभाव से ,
करना पड़ रहा हैं लोगों को पीड़ा सहन।
ऐसी प्रतिकूल स्थिति में हैं हमारी धरती
ग्रीष्म ऋतू में झुलसाने वाली गर्मी ,
सावन में अतिवृष्टि से आने वाला सैलाब ,
सर्दियों का समय से पहले विदाई लेना ,
बच्चों में सक्रमण का फैलना ,
ऐसी प्रतिकूल स्थिति में हैं हमारी धरती।
हमारी पृथ्वी एक ही है।
इसे बचाना हैं हमारा कर्त्तव्य।
पेड़ लगाव और पानी बचाव।
हैमनुष्य !अपनीजीवनशैलीमेंलाओबदला।
By L.Ashwini Reddy

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