मना है।
Updated: May 16, 2023
By Kamlesh Kumar Jashvantsinh Gadhavi
इस जहां में सबकुछ बोलना मना है।
सच के बारे में सच सच सोचना मना है।
खोलना चाहते हों तो खिलोने खोलों,
राझ दिलोंके खोलना मना है।
तोड़ सकते हो तो रिश्ते नाते तोड़ दो,
कांच का घर तोड़ना मना है।
सत्य की राह में पर्वतों आंधीओ को आने दो,
नकाबपोश जुठ को रोकना मना है।
टुकड़े टुकड़े होना है ये मोतीयों की माला को,
पत्थर है अब पथ्थर से जोड़ना मना है।
ऐलान हुआ है सवाल नहीं होगा हमसे,
जवाब नहीं मिलेगा सवाल छोड़ना मना है
By Kamlesh Kumar Jashvantsinh Gadhavi

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