Pita(Father)
By Himanshu Sahwal
सुना होगा तुमने कभी,की पैर उतने ही फैलाना,
जितनी बड़ी हो चादर, उस दायरे से बाहर ना जाना।
पर हुआ एक ऐसा शक्स,जिसने कर कर मेहनत,ये दायरा इतना बढ़ाया,
की तुम्हारी ज़रूरत से बढ़ती चादर को,कभी तुम्हारी खुशी के आड़े ना लगाया।।
भले ही इनकी एक डांट पर,तुम रोते सुबकते जाते थे मां के पास,
पर अपनी जेब पर तुम्हारे महंगे शौक का,होने दिया तुम्हे कभी एहसास?
बढ़ती हुई ज़िंदगी में,ना जाने उन्होंने कितने सपने देखे थे,
तारीफ भले ही शर्मा जी के बेटे की करती हों,पर चहेते तो हमेशा से ,उनके तुम ही थे।
स्कूल या कॉलेज,पर्सनल या प्रोफेशनल ,
हर समस्या में उनका यही था कहना,
"अबे तू क्यों टेंशन लेता है,तेरा बाप अभी जिंदा है ना!"
By Himanshu Sahwal

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