Phool Ki Kismat
By Sunita Sharma
बागबन ने सजाया था एक बाग
फूल खिले हजारा
किस्मत थी उनकी अलग अलग
पहूँचे मंडी और बाजार:
मंदिर में हुए अर्पण
किसी की दुआ में पड़े मजार
महफिलों में फेलाई खुशबू
खुशीयों में बने ऊप हार
कुछ हुए दफ़न
कुछ राख हुए जलकर:
निभाया किया अपना यूं कर्म
न पूछे किसी से उनका धर्म
फ़िर क्यूं नहीं सिखता हर इंसान
है इंसानियत का कर्म और धर्म
सिरफ प्यार सिर्फ प्यार
By Sunita Sharma

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