Philhaal
By Navneet
संभल जाना समय के हर पड़ाव में
संभलना फिर है क़तार में
विस्मय है इस सवाल में
रात है या फिर एक ढलता दिन
थोड़ी देर चलते है और
शायद सवेरा करार है
सब पास है जो खास है
पर एक एहसास है
हम रह गए चालक उस क़तार के
शायद हम ही खुद से अलहदा है फ़िलहाल में
सब खुशहाल है सब को यही ख़बर है
हम में कला है संभलने की,
संभल जाना हमारा रूबाब है
विपरीत उम्मीदों की क़तार है
और साथ एक सितार है
एक धुन है जो चल रही है
हम उनके ही संगी है
पर एक दरार है,
यह हमारा फ़िलहाल है।
By Navneet

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