"Pehla Pyaar"
Updated: Jun 7, 2023
By Madhav Menon
तुम्हारे बिना मेरा पहला प्यार कायम नहीं
मगर तेरे संग मेरी हकीकत भी तो नहीं...
प्यार... प्यार एक ऐसी बला है जिसमे रोज़ दो लोग सरफरोश होते है
एक मैं, और एक तुम
मैं इसलिए क्योंकि मेरा प्यार बस एक ख्वाब था
एक बचपना था जिसे शायद मैं कभी न भुला पाऊं
एक ज़िद थी जो शायद कभी न छोड़ पाऊं
एक दुआ जो कभी मुकम्मल नहीं होगी
और तुम, क्योंकि तुम कभी मेरे प्यार से वाकिफ नहीं हो पाई
कभी उन खुशियों को नही समझ पाई जो तुम्हारे साथ बांटे थे
कभी उन आंसुओ को नही समझ पाई जो तुम्हारे लिए बहाए थे
कभी उन दुआओं को नही समझ पाई जो तुमसे मांगे थे
हां तुम्हे अपना खुदा बना बैठा मैं,
शायद इसलिए तेरे बसेरे की सजावट में मैंने भी बड़े गुरूर से हाथ बटाया
शायद इसलिए हर दिन अपने दिल को सजाया
शायद इसलिए तेरे नाम की रट मेरे ज़ुबान से उतरती नही थी
हां माना, तुम मेरे कभी नही थे,
इसी सच्चाई को अपनी कब्र बना बैठा मैं
मेरा दिल, जो मंदिर की तरह रोज सजता था
अब रोज़ तेरी यादों के कब्रिस्तान में प्यार खोजता है
तेरी दुआओं में ही तेरा ज़िक्र खोजता है
और तेरे जिक्र की खोज में मैं बस और जख्मी होता हूं
हर कब्र को खोदता हूं मगर दर्द की मिट्टी में कौन ही खुशियां पाएगा
निकलती है तो बस हर आस की कुतरी हुई कुछ हड्डियां
हर आंसू का सूनापन और हर खुशी की लाश
पर प्यार भी एक अजूबा है
जिससे पहली बार हुआ उसी से दोबारा न हो जाए
इसलिए दोबारा किसी और को ले आता है
किसी और की जुल्फों में समंदर दिखता है
एक कब्रिस्तान भी कब तक ही सूना रहेगा
इसमें भी तो फ़ूल खिलेंगे, इसमें भी तो रौशनी पड़ेगी
ये रात चाहे कितनी ही सुहावनी लगे, मेरे मन का डर तो उजाला ही खारिज करता है
मेरे मन की खामोशी में कितना ही आराम मिले, धड़कन से ही जिंदगी चलती है
हां, मुझे दोबारा प्यार हुआ है, पर तुमसे नहीं
अब भी प्यार में दो लोग सरफरोश होते है
पर वो दो लोगो मे तुम नहीं
तुम बेदिल नही हो, बिलकुल नहीं हो
हां मगर मेरे इश्क के हकदार भी नही
जो प्यार न समझ पाए, उसे समझाया जाता है
और जो महसूस न कर सके, उसे जुदा।
मैंने अपने नए प्यार को भी प्यार ही नाम दिया
पर इसमें कुछ तो अलग सा लगता है
ये तुम्हारी कमी तो नहीं, क्योंकि यहां अब कोई और रहता है
क्या ये वो मासूमियत है, जो अब ज़हर सी ज़ंजीरें लगती है
क्या ये उन इत्तेफाकों का इंतकाम है, जो कुछ लम्हों में सिमट गया है
क्या ये मेरा पहला प्यार है, जो थोड़ा अधूरा रह गया है?
हां मगर, ये ज़ख्म भी मेरे दिल में महकते है
इस नए इश्क में तेरी वफ़ा से न कोई नाता है, न उसकी जरूरत
हां मगर, ये मेरा पहला प्यार भी नही
उसकी कब्र पे ना कभी फ़ूल खिलेंगे,न उसपे कभी कोई रोशनी आयेगी
बस उसमे तेरी यादों को दफनाया है
बस उस कब्र में मेरे पहले प्यार की लाश है।
By Madhav Menon

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