Paheli.. The Mystery.
Updated: Jun 10, 2023
By Tahrim Fatima
हर इक क़तरे में धुन है सवार, उससे मिलने की..
आख़िर कैसी मुहब्बत दी थी.. समुंदर ने ??
[ क़तरा - बूँद ]
लौट आती है हर लहर बेसाख़्ता, फ़िर उसी रेत पर..
ना जाने कैसी उल्फत दी थी.. साहिल ने !!
[ बेसाख़्ता - बिना इरादा ]
[ उल्फत - प्यार ]
बहार ले गई आंचल में हर रंग-ओ-बू, समेट कर..
उसे चंद रोज़ ठहराने की, ये क़ीमत दी थी.. गुलशन ने । ।
[ रंग-ओ-बू - रंग और ख़ुशबू ]
[ गुलशन - बाग़ ]
सय्याद ने, पिंजडों में ही थे, पर कतर लिए..
अहद-ए-रिहाई से सरशार, अंधी अक़ीदत की थी.. चिडिय़ों ने । ।
[ सय्याद - शिकारी ]
[ अहद-ए-रिहाई - सौगंध, मुक्ति की ]
[अंधी अक़ीदत - अंधभक्ति ]
देने को, कहकशाओं से भर लाई थी मैं तो, दामन मेरा..
फक़त लुत्फ-ए-आरज़ी ही मांगा मुझसे.. साइल ने । ।
[ कहकशाओं - galaxies ]
[ लुत्फ-ए-आरज़ी - क्षणिक आनंद ]
[ साइल - याचक/सवालि ]
मैंने तलब किया था जाम-ए-मस्त, ढाली उसने रक़ाबतें..
मैंने भी झूम कर पी, के ख़ुद बढ़ के पिलाई थी.. साक़ी ने । ।
[ रक़ाबतें - शत्रुता ]
[ साक़ी - शराब पिलानेवाला ]
By Tahrim Fatima

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