Organ Donation
By Shivali Bhardwaj
शरीर ना होगा काम का एक दिन खाक हो जाना है
मर के एक दिन सबने मिट्टी में मिल जाना है
क्या समझेगा कोई बेबसी उनकी
जो दरबदर भटक रहे है
अपनो की जान बचाने के लिय
कभी किडनी तो कभी लीवर ढूंढ रहे है
किसी की दिल की धड़कन रुकने वाली है
तो किसी की आंखों की रोशनी अंधेरा करने वाली है
रोज जिंदगी को कम होता देख
कुछ लोगो की ख्वाइशे अधूरी रहने वाली है
समय कब पलट जाए पता नही चलेगा
कब किसी के घर का चिराग बुझ जाए हमे एहसास नहीं होगा
तुम समझोगे उनकी तकलीफों को
बस एक बार उनकी जगह तुम्हे अपने आप को रख कर देखना होगा
किसी के भुजते दीपक को हम भुजने से रोक सकते है
करके हिम्मत थोड़ी सी हम कईओ की जान बचा सकते है
रूह तो एक दिन छोड़ देगी साथ हमारा
हम करके अन्गधान एक पुण्य जरूर कमा सकते है
ये चमड़ी अंत में जल कर राख हो जायेगी
कर देना धान इसका किसी को शरीर ढकने के काम आयेगी
जाते जाते भी किसी के चेहरे की मुस्कान बन जायेगी
तेरी ये जिंदगी किसी के लिए रब तो किसी के लिए फरिश्ता बंजाएगी
ये धड़कन तेरी एक दिन बंद हो जायेगी
कर देना धान इसका किसी की जीने के काम आयेगी
मरने के बाद भी दुआएं मिलेंगी तुझे
किसी की धड़कन बनकर तेरे नाम की जीत हो जायेगी
ये आंखें तेरी एक दिन अंधेरा ले आयेंगी
कर देना धान इनका किसी की जिंदगी रोशन हो जायेगी
दुखो की बजाए हम जिंदगी को खुशी से जीयेंगे
ना मरने से पहले प्छताबा होगा ना मरने के बाद होने देंगे
मौत को हमेशा बरधान समझ कर चलेंगे
दुखो की जगा हम जब मौत का जश्न मनाएंगे
देकर किसी को जीवन दान ,हम अमर कह लायेंगे
किसी की धड़कन बनकर जीयेंगे तो
किसी की जिंदगी रोशन बनायेंगे
हम किसी के घर का चिराग लौटाकर
उनके घर की खुशियां वापिस लायेंगे
By Shivali Bhardwaj

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