Noubat Sad Shayari
By Ajay Kumar
उम्र भर मिठास के लिए
तरसते रहें हम
एक घूंट ज़हर का पिया होता
तो आज ये नौबत नहीं आती
उम्र भर बाहर ज़िंदगी
तलाशते रहें हम
अगर खुद के अन्दर झांका होता
तो आज ये नौबत नहीं आती
उम्र भर दूसरों की बदसूरती पर
हंसते रहें हम
अगर खुद को आइने में देखा होता
तो आज ये नौबत नहीं आती
उम्र भर दूसरों में अएब
ढूंढते रहें हम
अगर खुद के गिरेबान में झांका होता
तो आज ये नौबत नहीं आती
खुदा को छोड़ कर
हमनें खुदा से सब कुछ मांग लिया
अगर खुदा को खुदा से मांगा होता
तो आज ये नौबत नहीं आती
उम्र भर खुदा से शिकायतें
ही करते रहें हम
अगर उसका शुक्रिया अदा किया होता
तो आज ये नौबत नहीं आती
By Ajay Kumar

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