Nazar Aate Hai
By Arpit Pokharna
कितने आसान ये सफ़र नज़र आते है
तुम साथ चलो तो रास्ते नज़र आते है
जब पुकारो तो नज़दीकियां खिलखिलाती है
जो चुप रहो तो फ़ासले नज़र आते है
तुम्हारें साथ उगाई सुबहों के सूरज
छत से मुझे रात भर नज़र आते है
ये ख़्वाब हक़ीक़त की शक्ल ले पाएगा कभी
फ़िलहाल इसके आसार ज़रा कम नज़र आते है
जाने कितने सालों से सुनसान सी आँखों में
अचानक आँसुओं के कुछ स्वर नज़र आते है
मेरी ही शक्ल के दो चेहरे
आईने में अलग अलग नज़र आते है
घास पे लेटे, गुनगुनाते दो शख़्स
मुझे जाने क्यों हम तुम नज़र आते है
कितने आसान ये सफ़र नज़र आते है
तुम साथ चलो तो रास्ते नज़र आते है
By Arpit Pokharna

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