Nadaan
By Yamini Sharma
कहते काफी खुदको मेरा है,
लेकिन जनता मुझे कोई नही,
मेरे आधे जज़्बात को अनदेखा कर,
मुझे नादान समझते हो,
नादान नही, वो तुम्हारी समझ के परे एक सोच है,
जिसे तुम्हारा ना दिल, ना दिमाग और ना ही प्रतिवेश समझता है,
इसमे न तुम्हारी गलती है न मेरी,
बस जिस मिट्टी मे जन्मे है, वही कुछ उलझी हुई है,
समझ तो उसे पूरी है, पर वो नादान बनता है,
और फिर मुझे नादान समझता है।
By Yamini Sharma

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