Naaraj Ho Kya?
By Gopal Ahir
सालो बीत गये, अभी तक नाराज हो क्या,
ना आपका कोई खत आरहा है,
ना कोई आपकी खबर,
ना आपके नाम का कोई फ़ोन,
नाराज हो क्या ?
बचपन में वो रेडियो टुटा था मुझसे,
पर माफ़ी का खत भी तो लिखा था,
ना किसी की दी हुई कोई चॉकलेट खाई,
ना किसी के घर बताये बिगेर खाना,
फिर भी नाराज हो क्या ?
दर्द हुआ था उस दिन बोहोत पेट में,
इसलिए रो पड़ा बाबा में,
आप ही ने तो गोद में उठाया था मुझे,
खुद गया था ना बाबा में,
उस दर्द को हराकर OT तक,
Dr. भी हैरान थे ना,
मुझे यूह दर्द में हस्ता देख,
पाव नहीं पहुँचते थे,
फिर भी वो नयी साइकिल चलायी ना मेने,
गिरा भी था, पर फिर उठ भी गया था ना में,
अकेले था तीसरी कक्षा से में,
जिसने साइकिल थामी थी स्कूल तक,
सब आपके लिए, फिर भी नाराज हो क्या ?
आपका सपना था में पायलट बनु,
पर नहीं बन पाया कभी आपके जाने के बाद,
आप चाहते थे बादलो को छू लू में,
पर नहीं छू पाया में,
इसलिए नाराज हो क्या ?
आपकी डाट ना सुनु,
इसलिए आज भी प्लेट भरी हुई नहीं छोड़ता,
सुबहे जल्दी उठ जाता हूँ मैं,
फिर भी आप नाराज हो क्या ?
गलती हुई होगी कोई मेरी,
जो यूँ आधे रासते अकेला हो गया,
पर माफ़ करदो ना अब मुझे,
हूँ भी तो आपका छोटा सा बेटा,
में तो बाबा कैंप में था ना,
ऊंचा दर्जा मिला था मुझे,
बोला था ना आपने लेने आओगे,
बोला था ना नया लैपटॉप दिलाओगे,
अपने हाथो से पसीना पोछा था मेरा,
उस दिन वो आखरी बार,
फिर क्यों नहीं आये मुझे लेने,
बस एक फ़ोन क्यों आया मुझे,
क्यों मामा की आँखो में आंसू आ गए मुझे देख,
क्यों उनकी बाइक हॉस्पिटल नहीं घर पहुची,
क्यों वहा सब मुझे देख रहे थे,
क्यों वहा आप बस युही सो रहे थे,
क्यों मेरी पुकार आपने सुनी नहीं,
क्यों बस सपने में आपने बस इतना कहा,
"चिंता मत कर धीरे धीरे सब हो जाएगा"
देखो आज बाबा, हो गया सब,
खुश है सब, खुदके पैरो पे खड़ा हूँ में,
मम्मी को दिखाया मैने वोह अवार्ड स्कूल का,
मम्मी को बताया मैने, आ गयी पहली कमाई,
पर आपको कैसे बताऊ ?
मम्मी पूछ रही है, रोया क्यों नहीं उस दिन के बाद कभी,
कैसे बताऊ की आपने उनके सामने रोने की इज़ाज़त नहीं दी,
कैसे बताऊ की ढोंग कर रहा हूँ में उनके सामने,
कैसे बताऊ की जिमेदारियो के बोज तले सुख गया है मेरे आसुओं का समंदर,
थक गया हूँ थोड़ा सा,
आओगे क्या मुझसे मिलने ?
खिलाओगे क्या मोती बेकरी का क्रीम रोल,
बिठाओगे क्या मुझे गाड़ी पे अपने पीछे,
फिरसे दिलाओ ना वो खिलोने मुझे,
फिरसे ले जाओ ना मुझे घूमने,
एक बार गले लगाओ ना मुझे,
क्यों नहीं आते युह,
नाराज हो क्या ?
पर एक दिन में आऊंगा ज़रूर, गले लगाऊंगा और बस युही खो जाऊंग।
By Gopal Ahir

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