Mutthi Bhar Ka Dil
By Sunita Sharma
मुठी भर का, नाजुक सा
धड़कता जाता
हा ये दिल ही तो है
मोहब्बत की निशानी
हार कर भी जीत जाता है
हा ये दिल ही तो है
दर्द सहता शिकायत न करता
चुप चाप सब सह जाता
हा ये दिल ही तो है
ख्वाइश करता सपने सजाता
आह भर के रह जाता
हा ये दिल ही तो है
अपना पराया न आंकता
दुख में दुखी, खुशी में खुश हो जाता
हा ये दिल ही तो है
माँ का कोमल पिता का कठोर
बच्चे का मासूम कहलाता
चंचल है ... सब का होकर रह जाता है
हा ये दिल ही तो है
कभी गर्व से फूलता
कभी मायूस हो जाता
कभी नादानिया करता
कभी मचल जाता
चलते चलते फिर थक कर एक दिन
खामोश हो जाता है
हा ...ये दिल ही तो है
By Sunita Sharma

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