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Mushaira 9

By Manas Saxena


तुम तो चले गये

मुझे नफ़रत तुमसे नहीं

नफ़रत तो अब

हर उस जगह से, हर उस गाने से

बारिश के उस मौसम से हैं जिसमें भीगते हुए थकते नहीं थे |


तुम तो चले गए 

तुमसे तो कोई कुछ नहीं पूछता 

मुझसे पूछते सब हैं 

कुछ दिलासा तो कुछ मजा लेते हैं |


तुम तो चले गए 

अब तो यार भी कहते हैं 

किसी और से दिल लगा ले 

लेकिन अब कौन फिर मेहनत करे 

दिल लगाने की

क्योंकि जानते हम भी हैं

वो दिल लगाना नहीं दिल बहलाना है |


तुम तो चले गए 

लेकिन मिलते रोज़ हो 

सामने से कुछ कहते नहीं 

लेकिन पीछे से देखते रोज़ हो 

जानता मैं भी सब हूँ लेकिन कुछ कहता नहीं मैं 

क्योंकि तुम तो चले गए अब कोई और के दोस्त हो ||

तुम तो चले गए 

लेकिन कुछ कहता नहीं मैं 

इसका मतलब ये नहीं कि फिर मिलना चाहता नहीं मैं |


मान लिया कि हकीकत में फिर मिलना मुमकिन नहीं 

चाहे मिलने के लिए इज्जत नफज को भी भुला दूँ 

लेकिन क्या फायदा तुम कभी हाँ करोगे नहीं |


तुम तो चले गये

लेकिन सपनों में अक्सर आते हो,

सब पहले जैसा है

बोलकर हमें बहलाते हो,

चाहते तो हम भी यहीं हैं इसलिए बहल भी जाते हैं

लेकिन सुबह ही मनहूस सच से सामने हो जाता हैं || 


By Manas Saxena


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