top of page

Mushaira 8

By Manas Saxena


दिल से दिल का सिलसिला कुछ खास था,

एक दोस्त था

जो मोहब्बत के कुछ पास था। 


वो हंसी, वो बातें, वो लम्हे अजीब,

लेकिन दोनों के दिल एक एहसास से करीब

पर इजहार का जज्बा कभी जागा ही नहीं, मोहब्बत थी

शायद हमने ही जाना नहीं | 

दिल में छुपी थी बातें, आँखों में राज़ भी 

वो था अपना, एक हमराज़ भी |


फिर एक दिन देखा, उसके साथ कोई और था, 

सीने में एक तीर सा चुभ गया, क्या यही उसके लिए मेरा प्यार था?


तब समझा की दोस्ती के पर्दे में छुपा एक एहसास था

जो था हमारा

अब किसी और के पास था |


अब हर शाम उसके हंसी का गम है, 

और दिल के कोने में एक रम्ज है

मोहब्बत तो है, पर वक़्त मजबूर है |



वक़्त गुज़र गया, यादों के सहारे ही सही

हम तो तुम्हारे ही थे, कोई गैर तो नहीं 

वो जो था अपना, अब बस एक बात है 

तुम नहीं तो क्या हुआ तुम्हारी यादों का तो साथ है ||


By Manas Saxena


Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page