Mohabbat
By Mridul Tiwari
मोहब्बत की आस हमने जगाई थी
तेरी-मेरी एक खूबसूरत दुनिया मैंने अपने मन में सजाई थी
तेरी हाथों की लकीर ने मुझे फ़कीर बताया था इश्क को तूने मेरे कुछ इस कदर ठुकराया था
हर दफा मेरी हैसियत को बीच में लाया था
अब ऐसे इश्क को मैं भी ठुकराता हूं
और तेरे हर सवाल को अपने जवाब बताता हूं बेशक रियासत में नहीं मैं बेशुमार हूं
पर अपनी मां का तो मैं भी राजकुमार हूं
तब हर अल्फ़ाज़ तेरे मंज़ूर थे
पर अब इज्ज़त का मैं भी खुद्दार हूं ।
By Mridul Tiwari

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