Missing Someone
By Vidyanshu Jain
ना जाने, मुझे ये क्या होने लगा है,
किसी की यादों में मन ,यूँ खोने लगा है,
सब कुछ होते हुए भी, कुछ खोया-खोया सा रहने लगा हूँ
सुनो ना, तुम्हे बहुत miss करने लगा हूँ.....
पहले कहाँ ,कभी ऐसा होता था,
कहाँ मैं कभी ,किसी की यादों में खोता था,
पहले कहाँ, ये इंतज़ार होता था,
और कहाँ मै कभी, किसी के लिए यूँ बेक़रार होता था
अब हर जगह ,सिर्फ़ तुम्हे ढूंढ़ने लगा हूँ,
सुनो ना, तुम्हे बहुत miss करने लगा हूँ....
रात में आने वाला ख़्याल हो तुम,
सुबह-सुबह की चाय हो तुम,
सबसे पहले बस अब,तुम्हारा ही ख़्याल आता है,
ना जाने क्यों ,तेरे बारे में सोचकर, मन बेहाल हो जाता है,
तेरी याद में ,ना जाने,मैं किस कदर पागल होने लगा हूँ,
सुनों ना,तुम्हे बहुत miss करने लगा हूँ.....
पहले कहाँ ,किसी के नाम को सुनकर, चेहरे पर यूँ हँसी आती थी,
पहले कहाँ ,किसी को याद करके ,चेहरे पर रूहासी छाती थी,
बस अब मन करता है कि, जल्दी से तुम यहाँ आ जायो,
सच में ना सही तो, बादल बनके ही बरस जायो,
ख़्याबो और सपनों में भी , तुम्हे ही देखने लगा हूँ,
क्या करूँ जान, तुम्हे बहुत miss करने लगा हूँ....
न जाने तुम कैसे बन गई, मेरे लिए इतनी खास
तुम्हारी याद दिलाती है मुझे , हर आती-जाती स्वास
कहने को तो, बहुत से लोग है, मेरे आस-पास
फिर भी, तुम्हारा न होना ,चुभता है, जैसे पैरों में चुभी फाँस
तुम्हारी याद में, यूँ शायर बनने लगा हूँ
सुनो ना, तुम्हे बहुत miss करने लगा हूँ....
Insta, Whatsapp पर तुम्हें online ढूंढ़ता हूँ,
तुम्हारे एक call की खातिर, मोबाइल साथ में लेकर घूमता हूँ,
भगवान से ज्यादा,अब तुम्हे याद कर लेता हूँ
तुम busy होगी, ये कहके मन को मना लेता हूँ,
शायद, तुम भी मुझे, यूँ miss करती होंगी,
इस गलतफहमी में जीने लगा हुँ,
सुनो ना, तुम्हें बहुत miss करने लगा हूँ....
By Vidyanshu Jain

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