Milna
By Lokesh Kumar
ये मुमकिन नहीं नादां,
के हम हों एक से;
जो मिलते मैं और तू,
हमारे ख़्वाब, हमारे रुझान, हूबहू,
तो क्या होता मैं,
और क्या होता तू।
पर कुछ शामें साथ गुजरें,
कुछ हों दिल से दिल की गुफ्तगू,
कुछ तुझ में मैं मिल जाऊं,
कुछ मुझमें तू,
तो शायद मुझे मैं मिल जाऊं और तूझे तू।।
By Lokesh Kumar

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