Meri Ladli
By Anshu Kumari
जिस आँखों से मैं अपनी लाडली को हमेशा चहकते देखता था,
आज उसी आँखों से मैं उसे तड़पते देखता हूँ
उसकी झोली मैं मैंने खुशियों की बौछार डाली थी,
आज उन सब खुशियों को बिखरते देखता हूँ
उसकी आँखों में बहुत सारे सपने थें,
आज उन सब सपनों को टूटते देखता हूँ
जिस आँखों से मैं अपनी लाडली को हमेशा चहकते देखता था
आज उसी आँखों से मैं उसे तड़पते देखता हूँ
उसकी जिंदगी में कुछ ख्वाहिशें थी
आज उन सब ख्वाहिशों को त्याग करते देखता हूँ
जो अपनी जिंदगी से बहुत प्यार करती थी
आज उसे ही अपनी जिंदगी को कोसते देखता हूँ
जिस आँखों से मैं अपनी लाडली को हमेशा चहकते देखता था
आज उसी आँखों से मैं उसे तड़पते देखता हूँ
वह सामाजिक कुरूतियो के खिलाफ हमेशा लड़ती थी
पर आज उसी को उस अन्याय से सहते देखता हूँ
उस पर सब जुल्म करते गए
वो सब सहती गई मेरे लिए
जिस आँखों से मैं अपनी लाडली को हमेशा चहकते देखता था
आज उसी आँखों से मैं उसे तड़पते देखता हूँ
जिसकी खुशी के लिए मैंने अपना सबकुछ बेच डाला
पर कभी उसे खुशी दे ही नहीं पाया मैं
मेरे पास अब कुछ नहीं हैं उसे देने के लिए
और उसके पास कुछ नहीं हैं अब खोने के लिए l
By Anshu Kumari

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