Mere Aansoo
By Jaspinder Singh Bains
मैंने भीड़ देखकर समेटे थे आंसू, जाने किसी की नजर ना पड़े,,
बड़ी ही मुश्किल से लपेटे थे आंसू , जाने किसी की नजर ना पड़े,,
मैंने बहुत मेहनत से उतारे थे आंसू , जाने किसी की नजर ना पड़े,,
फिर अकेले में निहारे थे आंसू, जाने किसी की नजर ना पड़े,,
मैंने रंगों से संवारे थे आंसू , जाने किसी की नजर ना पड़े,,
बस मैंने ही साहारे थे आंसू , जाने किसी की नजर ना पड़े,,
मुझे जान से प्यारे थे वो आंसू , जाने किसी की नजर ना पड़े,,
बेकरारी के बेकरारे थे वो आंसू , जाने किसी की नजर ना पड़े,,
मेरी ही किस्मत के मारे थे वो आंसू, जाने किसी की नजर ना पड़े,
एक अश्क नही बहुत सारे थे वो आंसू , जाने किसी की नज़र ना पड़े,
बस आंखों के आखरी किनारे थे वो आंसू , जाने किसी की नजर ना पड़े,
बैंस जैसे भी थे, मेरे प्यारे थे वो आंसू, जाने किसी की नज़र ना पड़े......
By Jaspinder Singh Bains

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