Mera Sawera
By Kuldeep Rai
मैंने कहा था रात को की रूक जाऊ। मुझे दिन के बेहेकाऊ में नहीं आना। रात थी। की रागों का काफिला। एक टक आवाज नहीं पर संगीत से भरा पूरा। मैंने कहा था रात को की रूक जाऊ। सूरज का कारवां मुझे नहीं देखना। ना लौ ना लिहाज।
बस एक मधुर सा एहसास। ना तप ना तपस्या। बस रूहू से रूह का तकाजा। बदन की ऊष्ण। बातो का बयान। मैंने कहा था रात को की रूक जाऊ। आज यह रात ही मेरा सवेरा।
By Kuldeep Rai

Comments