Mera Man
By Samira Gupta
मेरा मन
कभी व्यथित कभी विचलित
कभी लगे किसी झील सा शांत
कभी उठें सुनामी हजा़र...
मेरे नैन
कभी सूने कभी कजरारे
कभी कोरों पर रुकें अश्क जैसे शबनम
कभी बरसें जैसे मेघ हजा़र...
मेरा चित्त
कभी आनंदित कभी सच्चिदानंद
कभी उलझा कभी संभला
कभी भर आऐ जैसे गागर हजा़र...
मेरे साथी
कभी जिगरी कभी उखड़े
कभी सुख में सबसे अगाड़ी
कभी दुख में राह निहारुँ बार हजा़र...
मेरा आंचल
कभी भरा–पूरा कभी कहीं झीना
कभी कहीं कोई कोना गीला
फिर भी उसमें भरीं नेमतें हजा़र...
मेरे लब
कभी उदास कभी मुस्कुराते
कभी चुप कभी बुदबुदाते
पर हर पल शुकराना करें बार हजा़र
हर पल शुकराना करें बार हजा़र...
By Samira Gupta

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