Matlabi Sansar
By Deepak Kumar Agrawal
बहुत बोल लिया तुमने,
अब रुक भी जाओ।
सुन ली अब तुम्हारी बाते,
अब ठेर भी जाओ,
न कोई हैं तुम्हारा,
न कोई हैं हमारा।
जैसे हम चल पड़े हैं ,
वैसे बस तुम भी चलते जाओ।
संसार मतलबी हैं,
वो न कभी तेरी सुनेगा।
जरूरत हो जब उसे,
वो तब तुझे ढूंढेगा।
मायाजाल हैं ये उसकी,
अब उसे भूल भी जाओ।
जैसे हम चल पड़े हैं
वैसे बस तुम भी चलते जाओ।
By Deepak Kumar Agrawal

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