Masoomiyat
By Maria Sufia
घर सर उठाए रहती थी जो लाडली,
आज सर झुकाए बैठी क्यूं है ?
हमेशा चहकती रहती थी जो लाडली,
आज होंठ सिएं बैठी क्यूं है ?
आंखों में शरारत की चमक झलकाती थी जो लाडली,
आज आंसूओं के मोती पिरोएं बैठी क्यूं है ?
मासूमियत की मिसाल थी जो लाडली,
आज मासूमियत से ही मरहूम क्यूं है ?
इंसानियत के रंग भरती थी जो लाडली,
आज हैवानियत की कालिख में रंगी यूं है
वहशियत के रंग देख चुकी ये लाडली,
ए इंसानियत, तु इतनी बेरंग क्यूं है ??
By Maria Sufia

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