Manzil Ki Rah
By Shlok Jain
मंज़िल की राह तो सुहानी होती है,
हर मंजिल की तो अपनी कहानी होती है,
मिलने पर जिस्के अफसाने बनते हैं,
पर राह के सफर की ही तो बात कहते हैं,
हर मंजिल की राह सुहानी होती है।
कभी धूप की तरह चुबती तो,
कभी छाव बन साथ चलती,
कभी रेशम सी मुलायम तो कभी चट्टान जैसी सखत,
हर हालत से गुज़ारती है,
पर फिर भी मंजिल की राह सुहानी होती है।
मंजिल की अहमियत समझाती,
कभी करीब तो कभी दूर ले जाती,
कभी उलझा देती हैं, तो कभी खुद जवाब बन जाती हैं,
ये रहा ही तो है, जो हर मंजिल तक का सफर सुहाना बनती है।।
By Shlok Jain

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