Makam Motivational Poem
By Ajay Kumar
अभी गुज़र रहा हुं कूचे (गली) से
तभी मैं सब कि नज़र में हुं।
ए मकाम थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सफर में हुं।
ए मकाम थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सफर में हुं।
तू इन्त्ज़ार कर ए सहल
मैं मुश्किलों को हराने में मसरूफ़ हुं
तू इन्त्ज़ार कर साहिल
मैं तूफां को हराने में मसरूफ़ हुं
थोड़ा सब्र रख ए साहिल अभी मैं भँवर में हुं।
ए मकाम थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सफर में हुं।
ए मकाम थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सफर में हुं।
कितना और चलू तेरे साथ ए अज़ल राह
मन्ज़िल कहीं नज़र नही आ रही
कितनी देर और बैठू इस उदास महफ़िल में ए चाह
इस महफ़िल में रोनक़ नज़र नही आ रही
ए आफ़ताब थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सहर में हुं।
ए मकाम थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सफर में हुं।
ए मकाम थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सफर में हुं।
बरसों से तेरे साथ चलते चलते
ए सफर कहीं तुझसे मोहब्बत ना हो जाये
बरसों से तुझे हासिल करते करते
ए मकाम कहीं तुझसे नफरत ना हो जाये
ए हार थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं ज़फर में हुं।
ए मकाम थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सफर में हुं
ए मकाम थोडा़ इन्त्ज़ार कर अभी मैं सफर में हुं
By Ajay Kumar

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