Main Sirf Main Hona Chahta Hoon
By Karan Bardia
बिन सफर, बिन मंजिल का एक रास्ता होना चाहता हूं,
कहीं दूर जा कर बस थेहर जाना चाहता हूं,
मैं आज सिरफ मैं हूं चाहता हूं।
बिन ख्वाहिश बिन फरमाइश का ख्वाब देखना चाहता हूं,
मैं दुनिया की इस जिम्मेदारी से दूर होना चाहता हूं,
आज जिंदगी के 22 साल कात के मैं सिर्फ मैं होना चाहता हूं।
बिना दर्द भरे रिश्तों के भोज की एक जिंदगी जीना चाहता हूं,
मैं आसमान से गिर कर कहीं गम होना चाहता हूं,
दसरों की इच्छाओं से भारी इस जिंदगी में आज मैं सिर्फ मैं हूं होना चाहता हूं।
अकालेपन से भारी है कमीबी से दूर होना चाहता हूं,
सब मेरी खुशियों में शमील हो बस यही चाहता हूं,
हमशा अपने घरवालों के पास ही रहना चाहता हूं,
उनसे दूर रहने के बाद आज मैं सिर्फ मैं होना चाहता हूं।
अपने इश्क का इकरार करना चाहता हूं,
पर उसकी खुशी को भी नजरंदाज नहीं करना चाहता हूं,
वो खुश रहे चले मेरे साथ छै किसी और के साथ बस यही चाहता हूं,
आज उससे दूर हो गया बड़े दिनो बाद मैं सिरफ मैं होना चाहता हूं।
जिंदगी को बड़ी शिदात से जीना चाहता हूं,
किसी की बेवफाई से खुद को बरबाद नहीं करना चाहता हूं,
उसकी धोकाधारी से मुझे समझ आया की आज,
मैं सिर्फ मैं होना चाहता हूं।
By Karan Bardia

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