Main...Naari
By Ritu Sachdeva
मैं...
मैं लक्ष्मी तो हूँ...पर पूजनीय नहीं हूँ;
क्यों?
क्योंकि मैं कमाती नहीं हूँ!
मैं जननी तो हूँ...पर हकदार नहीं;
क्यों?
क्योंकि मैं कमाती नहीं हूँ!
मैं अन्नपूर्णा तो हूँ...पर सम्मानित नहीं हूँ;
क्यों?
क्योंकि मैं कमाती नहीं हूँ!
मैं सब कुछ संभालती हूँ, सँजोती हूँ...
पर फिर भी समझदार नहीं हूँ;
क्यों?
क्योंकि मैं कमाती नहीं हूँ!
मैं उसूलों और कायदे वाली तो हूँ...
पर तमीज़दार नहीं हूँ;
क्यों?
क्योंकि मैं कमाती नहीं हूँ!
मैं पुरूष से काही ज़्यादा कर्मयोगी हूँ...
पर अधिकारी नहीं हूँ;
क्यों?
क्योंकि मैं कमाती नहीं हूँ!
मैं सही तो हूँ...पर फैसला लेने वाली नहीं हूँ;
क्यों?
क्योंकि मैं कमाती नहीं हूँ!
मैं अस्तित्व में तो हूँ...
पर मान्य नहीं हूँ;
आख़िर क्यों?
अरे भई...क्योंकि मैं कमाती नहीं हूँ ना!!
By Ritu Sachdeva

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