Maatrutva Ek Adbhut Mahimaa
By Harsha Dedhia
अमूल्य, असीम, अनियमित उसका प्यार
त्याग और साहस की वह भण्डार
सपनों को अपने रौंदा हंसकर
जीत लिया जहाँन खुद हारकर
वेदना में भी वह मुस्कुरायी
जागते हुए कई रातें गुज़ारी
उसकी कोख से ही जीवन की शुरुआत
सदैव दिया है उसने पोषण निस्वार्थ
कठोरता में है स्नेह बसा
अश्रु में है गर्व छुपा
आलिंगन तक है उदासी का सफर
चारों पहर उसे औलाद की फ़िकर
गोद में उसके एक अनूठा सुकून
संतान की सलामती का एक अलग ही जुनून
निस्सीम धीरज और दुलार की प्रतिमा
मातृत्व - एकअद्भुतमहिमा
By Harsha Dedhia

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