Likha Ke Ishq
By Parul
लिखा के इश्क़ मै तेरा लाया हूँ ....
अब तड़प मिले या सबक मिले ....
एक तेरा हो जाने मैं जहान में आया हूँ ....
अब या तो तू मिले या कबर मिले ...
यूँ ही नही आयी है तू दुनिया में
तुझे मेरे लिए ही भेजा गया हैं
वरना जो न होना था दरमियान हमारे ...
कैसे आखिर ये दो सीधे साधे दिल मिले ...
न माने तो मत मान ...
एक तरफ़ा ही मेरा इश्क़ जान ....
मैं तो बस अब इश्क़ इबादत करने आया हूँ ...
जबसे तुमसे हम नाचीज़ मिले ...
कह दिया अब तो तुझे मैंने ...
मान लिया तुझे अपना सब कुछ मैंने ...
गर इंतज़ार ही नसीब हैं मेरा तो...
चल पड़ने दो ये सिलसिले ....
पर आखिर में क्या मिलेगा ....
ये सोच मैं सहम सा जाता हूँ ...
चलो मेरा तो होगा सो होगा ...
तेरे लिए मैं घबराता हूँ ....
न जाने तुझे फिर वक़्त न मिले ...
आ जाओ न मेरे रहबर ...
हम दो मिलकर .... एक हो चले ....
By Parul

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