Lamhe (लम्हे)
By Saksha Damare
छोटासा पल हे।
इस पल में सौ बाते।
इन बातो में तुम हो और तेरी मुलाकाते।
इस पल में लम्हा हे।
जहाँ सब कुछ ठहरे हे,
जहाँ सासो की आहट को दिल ने समझा है।
खामोशी की भी यहाँ अपनी जुबा है।
कोई ना समझे पर सब बया हो रहा है।
वक्त का यहा ना कोई पता हे।
मैं हू... तुम हो...
हमारे निशा हे,हमारे निशा हे।
By Saksha Damare

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