Kyo Na Jaane Kah Na Paate Hai
By Shlok Jain
क्यों ना जाने कह ना पाते है, जो दिलो में लिए फिरते है,
हकीकत बनाने की चाहत तो रखते है,
पर ख्वाबों में ही खुशी पा लिया करते है।
ना जाने किस बात से डरा करते है,
जान कर भी सब, फिर भी रुक जाते है,
क्यों ना जाने कह ना पाते है जो दिलो में लिए फिरते है।
ना दूर जाने का खौफ है, ना पास आने से कोई एतराज़,
ना कोई झिजक है, ना कोई फिकर,
कहने को भी बहुत कुछ है,
पर ना जाने क्यों कह ना पाते है जो दिलो में लिए फिरते है
ना कोई शिकायत रखते है,
ना कोई ख्वाइश रखते है,
हर बात तुमसे कह भी दिया करते है,
पर फिर भी न जाने क्यों हर बार
कह ना पाते है, जो दिलो में लिए फिरते है।
By Shlok Jain

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