top of page

Khushi

Mar 24, 2023
2 min read

Updated: Jun 7, 2023

By Prateek Bhadauria



एक खुशी की खातिर हम किस और बढ़े जा रहे हैं अपनों में गैर और गैरों में अपने ढूंढे जा रहे हैं एक खुशी की खातिर हम किस और बढ़े जा रहे हैं। एक मकसद था और एक मकसद है अपने आज को जीने का, एक मकसद था और एक मकसद है अपने आज को जीने का, मगर उसी को हम बर्बाद किए जा रहे हैं।

चला जाता हूं अक्सर अपने बचपन की हस्ती खेलती वादियों में जहां ना किसी का वजूद था और ना किसी का नाम था बस मैं था और मेरी एक खुशी की तमन्ना थी | जो था वह बहुत था, और जो ना था वह भी बहुत खूब था, पल भर ने जिंदगी ने करवट ली है अब ना वह बचपन रहा और ना वह खुशी । जब नहीं थे खर्चे तब चवन्नी भी जेब में खनका करती थी, और आज है नोटों की गड्डी पर आवाज बिल्कुल नहीं किया करती है|

आजमाया जिंदगी ने मुझे हर एक पहलुओं से, आजमाया जिंदगी ने मुझे हर एक पहलुओं से निभाया भी मैंने उसे बड़ी शिद्दत से, फिर भी ना जाने क्यों एक कसावट सी रहती है। ले चल जिंदगी मुझे कुछ दूर अपने साथ, ले चल जिंदगी मुझे कुछ दूर अपने साथ जहां सिर्फ मैं और मेरी खुशी मिलती है |




Some Good Lines

  1. है गर जिंदगी आसान तो जीना पड़ेगा , हर एक गम को सीना पड़ेगा , धागे जो थे कुछ उलझे से रिश्तों के उनको फिर से हमको ही बुनना पड़ेगा । ये ताना बाना किसी को रास आया तो किसी को खास आया जिया जिसने जी भर बस उसको ही कुछ खास नज़र आया । हमने भी किए थे कुछ वादे अपने से , जिन्हे निभाते निभाते उसका भी स्वाद आया । निकल आया बहुत दूर जिंदगी की कश्मकश से मगर किसी को ना नजर हमारा ख्वाब आया।

वो क्या लगाएंगे मेरी हस्ती का अंदाज , जिन्होंने किया था मेरी डूबती कश्ती को कभी नजरंदाज। वो तो समझे थे हम डूब जायेंगे , मगर उन नासमझ को भी ना पता था की हम तैरना भी सीख जायेंगे।



By Prateek Bhadauria




Recent Posts

See All
Mirrored Truth

By Rufaida Manzoor I stood beside the silent lake, With eyes that felt no urge to break. My hair fell low in shadows deep, The waters...

 
 
 
My Antidote

By Anveeksha Reddy You fill my books with your ink, seeping into the pages bright and brilliant The words etched into the cracks of it,...

 
 
 
Avarice

By Anveeksha Reddy You tear my skin and pick on my bones I label it as gluttony for you Churning and shattering the remains of my...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page