Khushi
Updated: Jun 7, 2023
By Prateek Bhadauria
एक खुशी की खातिर हम किस और बढ़े जा रहे हैं अपनों में गैर और गैरों में अपने ढूंढे जा रहे हैं एक खुशी की खातिर हम किस और बढ़े जा रहे हैं। एक मकसद था और एक मकसद है अपने आज को जीने का, एक मकसद था और एक मकसद है अपने आज को जीने का, मगर उसी को हम बर्बाद किए जा रहे हैं।
चला जाता हूं अक्सर अपने बचपन की हस्ती खेलती वादियों में जहां ना किसी का वजूद था और ना किसी का नाम था बस मैं था और मेरी एक खुशी की तमन्ना थी | जो था वह बहुत था, और जो ना था वह भी बहुत खूब था, पल भर ने जिंदगी ने करवट ली है अब ना वह बचपन रहा और ना वह खुशी । जब नहीं थे खर्चे तब चवन्नी भी जेब में खनका करती थी, और आज है नोटों की गड्डी पर आवाज बिल्कुल नहीं किया करती है|
आजमाया जिंदगी ने मुझे हर एक पहलुओं से, आजमाया जिंदगी ने मुझे हर एक पहलुओं से निभाया भी मैंने उसे बड़ी शिद्दत से, फिर भी ना जाने क्यों एक कसावट सी रहती है। ले चल जिंदगी मुझे कुछ दूर अपने साथ, ले चल जिंदगी मुझे कुछ दूर अपने साथ जहां सिर्फ मैं और मेरी खुशी मिलती है |
Some Good Lines
है गर जिंदगी आसान तो जीना पड़ेगा , हर एक गम को सीना पड़ेगा , धागे जो थे कुछ उलझे से रिश्तों के उनको फिर से हमको ही बुनना पड़ेगा । ये ताना बाना किसी को रास आया तो किसी को खास आया जिया जिसने जी भर बस उसको ही कुछ खास नज़र आया । हमने भी किए थे कुछ वादे अपने से , जिन्हे निभाते निभाते उसका भी स्वाद आया । निकल आया बहुत दूर जिंदगी की कश्मकश से मगर किसी को ना नजर हमारा ख्वाब आया।
वो क्या लगाएंगे मेरी हस्ती का अंदाज , जिन्होंने किया था मेरी डूबती कश्ती को कभी नजरंदाज। वो तो समझे थे हम डूब जायेंगे , मगर उन नासमझ को भी ना पता था की हम तैरना भी सीख जायेंगे।
By Prateek Bhadauria

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