Kuchh Bhi Nahi
By Mohammad Imran Khan
मैं तुमसे क्या ही बात करूँगा l
मेरे पास सवालों के सिवा कुछ भी नहीं ll
मैं तुमसे क्या ही इज़हार करूँगा l
तुम्हारे पास इंकार के सिवा कुछ भी नहीं ll
मैं तुमको क्या ही खुश रखूँगा l
मेरे पास ग़मों के सिवा कुछ भी नहीं ll
मैं तुम्हारी ख़्वाहिश क्या ही पूरा करूँगा l
मेरे पास मुफ़लिसी के सिवा कुछ भी नहीं ll
मैं तुम्हारे साथ क्या ही चल पाऊँगा l
मेरे पास काहिली के सिवा कुछ भी नहीं ll
मैं तुम्हारे काबिल क्या ही बन पाऊँगा l
मेरे पास ना-काबिलियत के सिवा कुछ भी नहीं ll
मैं तुम्हारे लिए क्या ही जंग लडूँगा l
मेरे पास मजबूरियों के सिवा कुछ भी नहीं ll
By Mohammad Imran Khan

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