Kuch Aisi Hai Tu
By Mridul Tiwari
तू कोमल फूल सी
मैं पहरेदार चट्टान सा
मल्लिक ए जहां तू मेरी
दीवाना तेरे मैं दीदार का
ओस मेरी तू भोर में
चांदनी तू रात घनघोर में
हवा में तेरा एहसास है
बारिश तो तेरी ही प्यास है
हर स्वयंबर का खिताब तू
प्रेम की किताब तू
शब्दों में बयां ना हो
नज़्म ऐसी खास है तू
हीरे लाखों फीके पड़ जाएं गहना ऐसी खास तू
काली घटा में एक किरण तू
सरजहां मंत्रमुग्ध वो कस्तूरी हिरण तू ।
By Mridul Tiwari

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