Krishnā
By Sanchita
तू रंग है, तू रस है
तू श्यामल, रंगरसिया तू।
तू छल है, चंचल है
मनमोहक मुस्कान तू
तू मधुर स्वर-गान है
तू नटखट, शैतान तू
तू अठखेली, तू नादान है
अचल, सर्वशक्तिमान तू!
तू नभ, तू थल,
हर कण में विराजमान है
तू निश्चल प्रेम,
स्नेह की रसखान है
तू अमिट, अमर, प्रवर
तू तेज है, तू सरल
तू सखा, तू प्रियवर
तू तनय, तू हरिहर
तू सांवल, तू निर्मल
अविरल- तू अध्याय है।
सच है, तू ताप है
तू सुमधुर वह जाप है
तू हल है, गीता ज्ञान तू
तू कवच है, कृपाण तू
रणभूमि की महक तू
घर आंगन की चहक तू
मंगल बेला, भोर तू
नन्हा माखनचोर तू।
तू सारथी, तू महारथी
मदमस्त बांसुरी की तान तू
तू रीत है, तू प्रीत है
तू धर्म है, तू नीति है
द्रौपदी का रखवाल तू
गोविंद है, ग्वाल तू
तू ही जग का निर्माण है
सुदर्शन की धार तू
साम-दाम-दंड-भेद है
अपराजित, विजयी, श्रेष्ठ तू!
हर नयन है प्यासे जिसके,
मनोहर, वही घनश्याम तू..
मनोहर! वही घनश्याम तू ।
By Sanchita

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