Koi Khaas
By Himanshu Sahwal
तपती हुई दोपहर में,मेरी छांव बन कर आना
शोर भरे इस मंज़र में, मधुर सा गीत बन कर आना
यूं तो चल पढ़ा हूं अकेला,साथ मेरा दोगी क्या?
रास्ता चुन लिया है अगर तो,मंजिल मेरी बनोगी क्या?
कुछ ऊंच नीच सी है ज़िंदगी,नींद में भी सुकून नहीं है
तैर जाऊं सागर को किसी,ऐसा भी कुछ जुनून नही है
लिखने बैठा हूं अब गीत कोई, इनके बोल तुम बनोगी क्या
मेरी किताब के किसी हसीन किस्से का,किरदार तुम बनोगी क्या?
By Himanshu Sahwal

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