Kitaabein
By Sanchita
येरिश्ताबहुतगहरा, बहुतपुरानाहै!
बचपनसे, खेल-खेलमें,
हमनेथामाथाइनकाहाथ।
छोटे-छोटेअक्षर, शब्द, फिरवाक्यमेंतब्दीलहोगए,
धीरे-धीरेनाजानेकब,हमइनकेइतनेकरीबहोगए
कभीअपनीबातोंकोकहनेकाज़रियाबनगई
तोकभीदुनियाकोदेखनेकानज़रियाबनगई
गर्मीमेंहमइन्हेंपंखेसाडुलातेथे
औरठंडमेंकंबलमेंदुबकइनकेसाथसोजातेथे
मौसमबदलतेरहे, दोस्तबदलतेरहे,
परयेहमेशापासरही
रातकोनींदनाआनेपर, अकेलेसफरमें,
येहमेशामेरेसाथरही
कभीछोटी-छोटीनोटदबाकर, पैसेबचानेमें
तोकभीकुछफूलदबाकर, पुरानीयादेंसुखानेमें
हमारेकहानीकिस्सोंकोकैदकररखतीरही
उम्रबढ़नेकेसाथ, हमारीनज़दीकियांभीबढ़तीगई
किसीनेसचहीकहाहै- "किताबेंहमारीसबसेअच्छीदोस्तहोतीहैं"
तभीतोहमदुनियासेछुपकरअक्सरइनकेबीचरोतेहैं!
औरकभीभीड़सेकटकरहमइनमेंहीआखोतेहैं।
By Sanchita

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